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संत साहित्य और लोकमंगल भावना-डॉ संघप्रकाश दुड्डे सोलापुर

संत साहित्य और लोकमंगल भावना- डॉ संघप्रकाश दुड्डे संगमेश्वर कॉलेज सोलापुर,9766997174,smdudde@gmail.com संत साहित्य और लोकमंगल भावना के बीच गहरा संबंध है। संत साहित्य भारतीय साहित्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें भक्ति, आध्यात्मिकता, और मानवता के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को बायां गया है। यह साहित्य आम लोगों के जीवन के मुद्दों और उनकी आध्यात्मिक भावना के साथ जुड़ा हुआ है।संत साहित्य में विभिन्न संतों की रचनाएँ शामिल हैं, जैसे कबीर, मीराबाई, सूरदास, नामदेव, तुकाराम, और बहुत से अन्य। ये संत साहित्यकार अपनी कविताओं, भजनों, और ग्रंथों के माध्यम से भगवान, प्रेम, और मानवता के महत्वपूर्ण संदेशों को साझा करते थे। उनके रचनाकार्यों में भक्ति और भाग्य के प्रति गहरा स्नेह होता था।लोकमंगल भावना संत साहित्य की एक महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें लोगों की सामाजिक, आध्यात्मिक, और भावनात्मक जरूरतों को समझाने का प्रयास किया जाता है। यह संत साहित्य के संदेशों को आम लोगों तक पहुंचाने का माध्यम होता है और उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। इसका यह मतलब नहीं है कि यह साहित्य केवल धार्मिक होता है, बल्कि यह सभी प...

विश्व शांति एवं विकास में हिंदी सिनेमा का योगदान-डॉ प्रा संघप्रकाश दुड्डे

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विश्व शांति एवं विकास में हिंदी सिनेमा का योगदान-डॉ प्रा संघप्रकाश दुड्डे  प्रस्तावना- विश्व शांति के लिए आज सिनेमा का सबसे बड़ा योगदान दिखाई देता है हिंदी सिनेमा हमारे लिए महत्वपूर्ण इसलिए है सिनेमा के कारण हमारे पूरे भारतीय समाज में एक पूरा बदलाव हमें दिखाई देता है इसके साथ-साथ सामाजिक शांति और विश्व शांति में भी हिंदी सि rewaनेमा ने अपना सबसे बड़ा योगदान देने का काम किया है हिंदी जगत में हिंदी सिनेमा ने जो महत्वपूर्ण पढ़ाओ पूरे किए हैं इसे देखकर हमें पता चलता है कि विश्व शांति में हिंदी सिनेमा का सबसे बड़ा योगदान हमें दिखाई देता है मदर इंडिया हो या अन्य जितनी भी सारे फिल्मी हो देश प्रेम और विश्व शांति की भावना उसमें हमें दिखाई देती है                                                                     भारतीय हिन्दी सिनेमा को लगभग 106 वर्ष हो गए हैं इस पूरे शतकीय दौर में न जाने कितने विषय आए और क...

सोशल मीडिया और समाज-डॉ प्रा संघप्रकाश दुड्डेडॉ प्रा संघप्रकाश दुड्डेसंगमेश्वर कॉलेज सोलापुर

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सोशल मीडिया और समाज-डॉ प्रा संघप्रकाश दुड्डे डॉ प्रा संघप्रकाश दुड्डे संगमेश्वर कॉलेज सोलापुर हिंदी विभाग प्रमुख 9766997174 smdudde@gmail.com सोशल मीडिया और समाज के बीच गहरा संबंध हैं। सोशल मीडिया ने समाज में विभिन्न प्रकार के प्रभाव डाले हैं, और इसने समाज की धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों पर प्रभाव डाला है। यहां कुछ मुख्य तरीके हैं जिनसे सोशल मीडिया समाज पर प्रभाव डालता है: संचार और संवाद: सोशल मीडिया ने लोगों के बीच संचार को सुविधाजनक बना दिया है। यह लोगों को आपसी वाद-विवाद करने, अपने विचार व्यक्त करने और अपने दृष्टिकोण को साझा करने का माध्यम प्रदान करता है. सामाजिक बदलाव: सोशल मीडिया ने समाज पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है, और इसके प्रभाव के कुछ मुख्य पहलुओं के बारे में यहां बताया गया है: संचार और संवाद: सोशल मीडिया से लोग आसानी से बातचीत कर सकते हैं, जो संचार को बढ़ावा देता है। यह लोगों को दुनियाभर के घटनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने का माध्यम प्रदान करता है. सामाजिक संजाल: सोशल मीडिया के माध्यम से लोग दोस्तों और परिवार के सदस्यों क...

जयप्रकाश कर्दम के साहित्य में आंबेडकरवादी जीवन मूल्य की भावना-"डॉ प्रा संघप्रकाश दुड्डे

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"जयप्रकाश कर्दम  के साहित्य में आंबेडकरवादी जीवन मूल्य की भावना" डॉ प्रा संघप्रकाश दुड्डे संगमेश्वर कॉलेज सोलापुर हिंदी विभाग प्रमुख 9766997174 smdudde@gmail.com प्रस्तावना-  जयप्रकाश कर्दम एक ऐसा नाम है जिनके साहित्य में मानवीय चेतना मानवीय मूल्य राष्ट्रीय एकता अखंडता तथा परिवर्तनवादी विचारधारा की झलक दिखाई देती है उनका समग्र साहित्य अंबेडकरवाद से प्रेरित है उनके  साहित्य में अन्याय के खिलाफ तथा न्याय की मांग के लिए उनके शब्द अंगार बन जाते हैं उनके साहित्य में चेतना इतनी महत्वपूर्ण है कि वह हमें सोचने के लिए मजबूर करती है मानवता का विकास मनुष्यता से होता है और मनुष्यता का विकास मानवता की ओर बढ़ना चाहिए यह धारा उनके साहित्य में हर  पन्नों पर हमें दिखाई देती है/ जयप्रकाश कर्दम ने अपने काव्य-संग्रहों में दलित समाज जीवन का चित्रण अत्यंत सूक्ष्मता के साथ किया है। उच्चवर्गीय समाज की जातिवादी मानसिकता के कारण दलित अपमान, उपेक्षा, नफरत, और शोषण की जिंदगी जी रहा है । सवर्णो दवारा दलितों के साथ अन्याय एवं अत्याचारपूर्ण व्यवहार किया हुआ नजर आता है । जयप्रकाश कर्दम ...

संगमेश्वर महाविद्यालय हे माझ्यासाठी प्रेरणास्थान आहे -डॉ नसीमा पठाण

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संगमेश्वर महाविद्यालय हे माझ्यासाठी प्रेरणास्थान आहे - डॉ नसीमा पठाण  सोलापूर येथील संगमेश्वर महाविद्यालयात हिंदी दिनानिमित्त प्रसिद्ध लेखक व कवी डॉ.नसीम पठाण यांचे व्याख्यान झाले.सुरुवातीला संगमेश्वर गीताने कार्यक्रमाची सुरुवात झाली.कार्यक्रमाच्या प्रमुख पाहुण्यांच्या हस्ते दीपप्रज्वलन करण्यात आले. हिंदी विभाग प्रमुख डॉ.संघ प्रकाश दुड्डे यांनी प्रस्ताविक केले .प्रारंभी प्रमुख पाहुणे डॉ.नसीम पठाण यांचा परिचय डॉ.दादासाहेब खांडेकर यांनी करुन दिला.प्राचार्य डॉ.राजेंद्र देसाई यांच्या शुभहस्ते  प्रारंभी प्रमुख पाहुणे डॉ.नसीम पठाण यांचा सत्कार करण्यात आला. प्राचार्य डॉ.राजेंद्र देसाई यांचा कमळ पुष्प देऊन सन्मान करण्यात आला.डॉ.राजेंद्र देसाई यांचा सत्कार हिंदी विभागप्रमुख डॉ.संघ प्रकाश दुड्डे यांनी  कमळ पुष्प देऊन सन्मान करण्यात आला.उपप्राचार्य डॉ.सुहास पुजारी यांचा सत्कार . डॉ.दादासाहेब खांडेकर यांनी कमळ पुष्प देऊन गौरव करण्यात आला.यावेळी संघमित्रा, गायत्री मै...

पढ़ाई के साथ जीवन अनुभव को लिखना जीवन की सार्थकता है-डॉ नसीमा पठान

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हिंदी दिवस के उपलक्ष में संगमेश्वर महाविद्यालय सोलापुर में प्रसिद्ध लेखिका कवित्री डॉ नसीम पठान जी का व्याख्यान रखा गया आरंभ में संगमेश्वर गीत से कार्यक्रम का आरंभ हुआ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के करकमलो द्वारा  दीपक दीपप्रज्वलन  किया गया प्रस्ताविक  हिंदी विभाग प्रमुख डॉ संघप्रकाश दुड्डे ने किया अतिथि का परिचय डॉ दादा साहब खांडेकर ने किया  आरंभ में प्रधानाचार्य डॉ राजेंद्र देसाई के करकमलों  द्वारा प्रमुख अतिथि डॉ नसीम पठान का सम्मान किया गया डॉ राजेंद्र देसाई का सम्मान हिंदी विभाग प्रमुख डॉ संघ प्रकाश दुड्डे के करकमलों  द्वारा किया गया उप प्रधानाचार्य डॉ सुहास  पुजारी का सम्मान डॉ दादा साहब खांडेकर जी के कर कमल द्वारा संपन्न किया गया इस वक्त गायत्री मैत्रे  तथा विमल शर्मा ,संघमित्रा इन छात्रों ने हिंदी दिवस के उपलक्ष में छात्रों के मन में हिंदी के प्रति जो भाव होता है उन भावों को स्पष्ट करने का सफल प्रयास किया  इस वक्त छात्रों को मार्गदर्शन करते समय डॉ नसीम पठान जी ने कहा...