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संगमेश्वर कॉलेज, सोलापुर: ७० वर्षों की गौरवशाली यात्रा और स्वायत्तता का नया अध्याय (संस्थागत विस्तृत रिपोर्ट) डॉ संघप्रकाश दुडडे हिंदी विभाग प्रमुख

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संगमेश्वर कॉलेज, सोलापुर: ७० वर्षों की गौरवशाली यात्रा और स्वायत्तता का नया अध्याय (संस्थागत विस्तृत रिपोर्ट) विवरण: यह रिपोर्ट संगमेश्वर कॉलेज के सात दशकों के शैक्षणिक इतिहास, इसकी स्वायत्तता की उपलब्धि, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के सफल क्रियान्वयन और भविष्योन्मुखी विजन का एक प्रामाणिक दस्तावेज़ है। १. विरासत और स्थापना: 'कायकवे कैलास' का संकल्प संगमेश्वर कॉलेज की स्थापना सोलापुर के शैक्षिक मानचित्र पर एक युगांतकारी घटना थी। जून १९५३ में, दो दूरदर्शी महापुरुषों, स्व. श्री नागप्पा बी. काड़ादी और स्व. श्री मडेप्पा बी. काड़ादी ने इस संस्थान की आधारशिला रखी। सोलापुर के ऐतिहासिक 'सात रस्ता चौक' (Saat Rasta Chowk) पर स्थित यह परिसर पिछले सात दशकों से उच्च शिक्षा के जीवंत साक्षी (Testimony) के रूप में 'शानदार और शांत' (Splendid and Serene) खड़ा है। 'कन्नड़ भाषाई अल्पसंख्यक' (Kannada Linguistic Minority) दर्जे के साथ, यह संस्थान अपनी सांस्कृतिक जड़ों और आधुनिक वैश्विक दृष्टिकोण के बीच एक सेतु का कार्य करता है। "ज्ञान की कि...

पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी (PES): डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की शैक्षणिक और सामाजिक विरासत - एक विस्तृत ऐतिहासिक रिपोर्ट-डॉ संघप्रकाश दुडडे MA,Phd,SET,D Liitt

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पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी (PES): डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की शैक्षणिक और सामाजिक विरासत - एक विस्तृत ऐतिहासिक रिपोर्ट 1. प्रस्तावना: स्थापना और संस्थापक का दृष्टिकोण पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी (PES) की स्थापना 8 जुलाई 1945 को आधुनिक भारत के प्रखर चिंतक और महान शिक्षाविद् डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा की गई थी। एक ऐतिहासिक शोधकर्ता के रूप में यह रेखांकित करना आवश्यक है कि इस संस्था की नींव एक ऐसे कालखंड में रखी गई थी जब दलितों, पिछड़ों और आर्थिक रूप से वंचित वर्गों के लिए उच्च शिक्षा की राह में गंभीर सामाजिक और संरचनात्मक बाधाएं मौजूद थीं। डॉ. आंबेडकर का दृष्टिकोण केवल साक्षरता या व्यावसायिक योग्यता तक सीमित नहीं था। उन्होंने इस संस्था के ध्येय को स्पष्ट करते हुए कहा था कि पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी का उद्देश्य "केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि 'सामाजिक लोकतंत्र' (Social Democracy) का निर्माण करना है।" उनके अनुसार, शिक्षा वह आधारशिला है जो दमित वर्गों में राजनीतिक चेतना और मानवीय गरिमा जागृत कर उन्हें आधुनिक लोकतांत्रिक राष्ट्र का सक...

सोलापूर शहरातील बौद्ध विहार एक सांस्कृतिक आणि धार्मिक वारसा प्रस्तुती प्रोफेसर डॉक्टर संघ प्रकाश दुड्डे

सोलापूर शहरातील बौद्ध विहार : एक सांस्कृतिक आणि धार्मिक वारसा -प्रो. डॉ.संघप्रकाश दुड्डे सोलापूर सोलापूर शहराला बौद्ध धर्माच्या दृष्टीने अत्यंत महत्त्वाचे स्थान आहे. येथील बौद्ध विहार केवळ पूजास्थान नसून, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांच्या विचारांचे जिवंत प्रतीक म्हणूनही ओळखले जातात. या लेखात सोलापूर शहरातील बौद्ध विहारांचा इतिहास, निर्मिती, व्यवस्थापन आणि तेथे साजरे होणारे विविध कार्यक्रम याविषयी सविस्तर माहिती देण्यात आली आहे. ऐतिहासिक पार्श्वभूमी अस्थि विहार सोलापूर शहरातील बौद्ध विहारांचा इतिहास हा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांच्याशी घट्ट जोडलेला आहे. सोलापूर शहरातील मिलिंद नगरीतील अस्थि विहार या विहाराची स्थापना इ.स. १९५६ मध्ये झाली. हा विहार मिलिंद नगर, बुधवार पेठ येथे आहे. या विहाराचे महत्त्व अधिक असण्याचे कारण म्हणजे, महाराष्ट्रातील नागपूर, मुंबई आणि सोलापूर अशा तीन ठिकाणी बाबासाहेबांच्या अस्थी आहेत. ६ डिसेंबर १९५६ रोजी बाबासाहेबांच्या महापरिनिर्वाणानंतर तीन दिवसांनी त्यांच्या अस्थी सोलापूरमध्ये आणण्यात आल्या होत्या. त्यासाठी भैय्यासाहेब आंबेडकरांनी परवानगी दिली होती. अस्थी आणल्यावेळी र...

संगमेश्वर कॉलेज सोलापूर ट्रेकिंग क्लब चा हडसर किल्ला व नाणेघाट एक दिवसीय ट्रेक यात्रा वर्णन -डॉ संघप्रकाश दुड्डे

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  संगमेश्वर कॉलेज सोलापुर ट्रैकिंग क्लबचा हडसर गढ़ व नाणे घाट एकदिवसीय सहल दिनांक: ३० ऑगस्ट २०२६ आयोजक: संगमेश्वर कॉलेज, सोलापूर ट्रॅकिंग क्लब स्थळ: हडसर किल्ला व नाणे घाट (पुणे जिल्हा) सहभागी: १०७विद्यार्थी, ८ प्राध्यापक, ट्रॅकिंग क्लब प्रमुख डॉ. शिवाजी  मस्के  --- प्रातःकालची सुरुवात सकाळी ८:०० वाजता संगमेश्वर कॉलेजच्या प्रांगणातून ट्रॅकिंग क्लबचा झेंडा हाती घेऊन आम्ही प्रवासाला सुरुवात केली. विद्यार्थ्यांच्या उत्साही चेहऱ्यावर उत्सुकता आणि रोमांच स्पष्ट दिसत होते. डॉ. शिवाजी  मस्के सरांनी सर्वांना सुरक्षिततेच्या सूचना दिल्या सर्व विद्यार्थी ची ओळख करुण  एक मेकांचा परिचय केला डॉ बजरंग मेटिल यानी भक्ति गीत सादर केले, डॉ संघप्रकाश दुडेड यानी कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है हे गीत सादर केले आणि आमचा बस प्रवास सुरू झाला. वाटेत गाणी, चर्चा आणि निसर्गाच्या सुंदर दृश्यांनी वेळ कसा गेला कळलाच नाही. --- हडसर गढ़ किल्ल्यावर पोहोच (दुपारी १२:३०) दुपारी १२:३० वाजता आम्ही हडसर गढ़ किल्ल्यावर पोहोचलो. ...

नागानिका का नाणेघाट : मूलपाठप्रस्तुति डॉ संघप्रकाश दुड्डे संगमेश्वर कॉलेज सोलापुर

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नागानिका का  नाणेघाट   अभिलेख : मूलपाठ प्रस्तुति डॉ संघप्रकाश दुड्डे संगमेश्वर कॉलेज सोलापुर MA,SET,ph d ,D.Litt  [ बायीं दीवार पर ] १. [ॐ] (सिधं) नमो प्रजापति]१ नो धंमस नमो ईदस नो संकंसन-वासुदेवान चंद-सूरान२ [महि] मा [व] तानं चतुनं चं लोकपालानं यम वरुन-कुबेर-वासवानं नमो कुमारवरस [ ॥ ] [वेदि]३ सिरिस रञो २. …. [वी] रस सूरस अ-प्रतिहत-चकस दखि [ नप ] ठ-पतिनो ….४ ३. [मा] …… [बाला] य५ महारठिनो अंगिय-कुल-वधनस सगर गिरिवर-वल [ या ] य पथविय पथम वीरस वस य व अलह वंतठ ? …… सलसु महतो मह ….. ४. सिरिस …… ६ भारिया [य] [;] देवस पुतदस वरदस कामदस धनदस [वेदि] सिरि मातु [य] सतिनो सिरिमतस च मातु[य] सोम [;]…… ५. वरिय …….  [ना] गवर-दयिनिय मासोपवासिनिय गहतापसाय चरित-ब्रम्हचरियाय दिख-व्रत यंञ-सुंडाय यञा हुता धूपन-सुगंधा य निय ……. ६. रायस ……….७ [य]ञेहि विठं [।] वनो अगाधेय यंत्रो द[ख]ना दिना गावो बारस १० [+] २ असो च १[ । ] अनारभनियो यंञो दखिना धेतु …… ७. दखिनायो दिना गावो १००० [+] १०० हथी १० ….. ८. ……. स ससतरय [वा]सलठि २०० [+] ८० [+] ६ कुभियो रूपामयियो १० [+] ७ भि ….. ९. रिको यं...

नाणेघाट (पुणे/जुन्नर) का ब्राह्मी शिलालेख प्रस्तूति डॉ संघप्रकाश दुड्डे संगमेश्वर कॉलेज सोलापुर MA,SET,ph,.d.D.Litt

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नाणेघाट (पुणे/जुन्नर) का ब्राह्मी शिलालेख (Naneghat Inscription) भारत और विशेष रूप से महाराष्ट्र के प्राचीन इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। यह शिलालेख पुणे जिले के जुन्नर के पास नाणेघाट की एक प्राकृतिक गुफा (प्रतिमागृह) में उकेरा गया है। १. लिपि और भाषा लिपि: प्राचीन ब्राह्मी लिपि (Brahmi Script). भाषा: प्राकृत भाषा (Prakrit Language - प्राकृत महाराष्ट्री का प्रारंभिक रूप). कालखंड: ईसा पूर्व पहली शताब्दी (लगभग २२०० वर्ष पूर्व का सातवाहन काल). २. शिलालेख की रचना एवं मुख्य विषय यह शिलालेख सातवाहन सम्राज्ञी रानी नागनिका (नायनिका) द्वारा उकेरवाया गया था। अपने पति राजा प्रथम सातकर्णी के निधन के पश्चात, अपने अल्पवयस्क पुत्र वेदिसिरी के शासनकाल में राज्य संचालन करते हुए उन्होंने इस वीरता और यज्ञों का विवरण दीवारों पर अंकित करवाया। A. मंगलाचरण (देवताओं की स्तुति) शिलालेख की शुरुआत धार्मिक आह्वान से होती है, जिसमें वैदिक और हिंदू देवताओं की वंदना की गई है: धर्म (Dharma),...