हिंदी उपन्यास साहित्य उद्भव और विकास स्पष्ट कीजिए
हिंदी उपन्यास साहित्य का उद्भव और विकास अपेक्षाकृत आधुनिक है, जो 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से आरंभ होता है। अंग्रेजी और बांग्ला उपन्यासों के प्रभाव, औद्योगीकरण, नगरीकरण एवं सामाजिक सुधार आंदोलनों ने इस विधा को जन्म दिया। नीचे इसके विकास-क्रम को प्रमुख कालखंडों में स्पष्ट किया गया है: 1. उद्भव काल (19वीं सदी का अंत – 1900) · प्रथम हिंदी उपन्यास: श्रीनिवास दास का ‘परीक्षा गुरु’ (1882) – यह नैतिक, सुधारवादी एवं उपदेशप्रधान है। · अन्य प्रारंभिक रचनाएँ: लाला श्रीनिवास दास, बालकृष्ण भट्ट ‘नवीन’, देवकीनंदन खत्री का ‘चंद्रकांता’ (1888) – जो रोमांच, तिलिस्म, ऐय्यारी पर आधारित लोकप्रिय धारा का सूत्रपात करता है। · प्रवृत्ति: आख्यानगत अपरिपक्वता, अंग्रेजी/बांग्ला अनुकरण, सामाजिक बुराइयों पर व्यंग्य। 2. प्रेमचंद युग (1910-1936) – यथार्थवाद का शिखर · मुंशी प्रेमचंद हिंदी उपन्यास के 'सम्राट' कहे जाते हैं। उन्होंने ग्रामीण-नगरीय जीवन का यथार्थ, जाति-व्यवस्था, किसान शोषण, नारी-विमर्श, और राष्ट्रीयता को केंद्र में रखा। · प्रमुख उपन्यास: सेवासदन (1918), प्रेमाश्रम, रंगभूमि, निर्मला, गबन, कर्मभूम...