सम्राट अशोक का भारतीय एकता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका स्पष्ट कीजिए
सम्राट अशोक के समग्र सांस्कृतिक योगदान पर बात करेंगे। ध्यान रहे, अशोक महज़ एक विजेता सम्राट नहीं थे, बल्कि भारत के पहले सांस्कृतिक एकीकरणकर्ता थे। उनका योगदान मूर्तियों, लिपियों, धर्म, कला और नैतिकता—सभी क्षेत्रों में फैला है। आइए इसे 5 प्रमुख शीर्षकों में समझें: --- 1. धार्मिक योगदान – बौद्ध धर्म का अंतर्राष्ट्रीय प्रसार · कलिंग युद्ध (261 ई.पू.) के बाद अशोक ने शस्त्र त्यागकर धम्म (बौद्ध धर्म) अपनाया। · उन्होंने बौद्ध भिक्षुओं को सीरिया, मिस्र, यूनान, श्रीलंका, बर्मा तक भेजा—यह धर्म-दूतावास विश्व इतिहास की पहली बड़ी मिशनरी गतिविधि थी। · श्रीलंका में उनके पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा ने बौद्ध धर्म स्थापित किया, जो आज भी वहाँ जीवित है। · उन्होंने तीसरी बौद्ध संगीति (पाटलिपुत्र) का आयोजन करके बौद्ध त्रिपिटक को मानक रूप दिया। --- 2. कला और वास्तुकला – स्तूप, स्तंभ और शिलालेख अशोक ने पत्थर को माध्यम और धम्म को संदेश बनाकर कला को जन-जन तक पहुँचाया: · अशोक-स्तंभ: सारनाथ का सिंह-चतुर्मुख स्तंभ (जो भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है)—यह बौद्ध कला की बेजोड़ कृति है। ध्यान दें, शीर्ष पर चार शेर एक...