कहानी "महाशूद्र" (मोहनदास नैमिशराय) - एक समीक्षात्मक विश्लेषण
कहानी "महाशूद्र" (मोहनदास नैमिशराय) - एक समीक्षात्मक विश्लेषण "महाशूद्र" मोहनदास नैमिशराय के प्रसिद्ध कहानी संग्रह "अपने-अपने पिंजरे" (1995) में संकलित एक महत्वपूर्ण कहानी है। यह कहानी दलित साहित्य में जाति के भीतर के स्तरीकरण और उससे उत्पन्न पीड़ा एवं अंतर्द्वंद्व को उजागर करती है। मुख्य विषय-वस्तु एवं संदर्भ: "महाशूद्र" शब्द ऐतिहासिक रूप से शूद्र वर्ण के भीतर एक विशिष्ट समुदाय को दर्शाता है, जो सामाजिक पदानुक्रम में "अछूत" दलितों से ऊपर, परंतु अन्य उच्च जातियों से नीचे माना जाता रहा है। नैमिशराय इस "बीच की जगह" (Liminal Space) के सामाजिक-मनोवैज्ञानिक संकट को कहानी का केंद्र बनाते हैं। समीक्षा के प्रमुख बिंदु: 1. जाति की आंतरिक जटिलताओं का चित्रण: · कहानी दलित समुदाय के भीतर मौजूद आंतरिक वर्गीकरण और ऊंच-नीच को बेनकाब करती है। यह दिखाती है कि जाति का उत्पीड़न केवल "सवर्ण बनाम दलित" का द्वंद्व नहीं, बल्कि एक सतत पदानुक्रम है जहाँ हर समूह किसी न किसी से ऊपर या नीचे खड़ा है। · "महाशूद्र" पात्र अपनी पहचान के सं...