बूढ़ी काकी का चरित्र चित्रण कीजिए
'बूढ़ी काकी' प्रेमचंद की वह करुण कहानी है, जिसकी नायिका एक असहाय, वृद्ध विधवा है। उसका चरित्र मानवीय कमजोरियों और करुणा का अद्भुत मिश्रण है। आइए, इस चरित्र को गहराई से समझें: 1. विश्वास और निस्वार्थता (Trust & Selflessness) काकी ने अपनी सारी जायदाद भतीजे को इस विश्वास से सौंप दी कि वह उनकी देखभाल करेगा। यह उनके सरल हृदय और परिवार के प्रति अटूट विश्वास को दिखाता है। वह स्वार्थी नहीं थीं, बल्कि अपनों के लिए सब कुछ न्योछावर करने वाली स्नेहिल महिला थीं। 2. लाचारी और आश्रयहीनता (Helplessness) संपत्ति हथियाने के बाद उनकी स्थिति दयनीय हो जाती है। वह उसी घर में एक कैदी बनकर रह जाती हैं, जिसकी वह मालकिन थीं। उनके पास न तो कोई अधिकार है, न आवाज, न ही कोई और सहारा। उनकी यह मजबूरी पाठकों को बुजुर्गों की उपेक्षा पर सोचने पर मजबूर करती है। 3. भोजन के प्रति आसक्ति (Obsession with Food) भूख उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है। बुढ़ापा उन्हें बच्चों जैसा बना देता है - उनकी एकमात्र इच्छा 'अच्छा खाना' रह जाती है। तिलक के दिन पूरी (मालपुआ) के लिए उनका तरसना और अपमान सहकर भी रसोई की ओर जान...