पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी (PES): डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की शैक्षणिक और सामाजिक विरासत - एक विस्तृत ऐतिहासिक रिपोर्ट-डॉ संघप्रकाश दुडडे MA,Phd,SET,D Liitt

पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी (PES): डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की शैक्षणिक और सामाजिक विरासत - एक विस्तृत ऐतिहासिक रिपोर्ट

1. प्रस्तावना: स्थापना और संस्थापक का दृष्टिकोण

पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी (PES) की स्थापना 8 जुलाई 1945 को आधुनिक भारत के प्रखर चिंतक और महान शिक्षाविद् डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा की गई थी। एक ऐतिहासिक शोधकर्ता के रूप में यह रेखांकित करना आवश्यक है कि इस संस्था की नींव एक ऐसे कालखंड में रखी गई थी जब दलितों, पिछड़ों और आर्थिक रूप से वंचित वर्गों के लिए उच्च शिक्षा की राह में गंभीर सामाजिक और संरचनात्मक बाधाएं मौजूद थीं।

डॉ. आंबेडकर का दृष्टिकोण केवल साक्षरता या व्यावसायिक योग्यता तक सीमित नहीं था। उन्होंने इस संस्था के ध्येय को स्पष्ट करते हुए कहा था कि पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी का उद्देश्य "केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि 'सामाजिक लोकतंत्र' (Social Democracy) का निर्माण करना है।" उनके अनुसार, शिक्षा वह आधारशिला है जो दमित वर्गों में राजनीतिक चेतना और मानवीय गरिमा जागृत कर उन्हें आधुनिक लोकतांत्रिक राष्ट्र का सक्रिय नागरिक बनाती है।

2. संस्था के मार्गदर्शक सिद्धांत: पंचशील आदर्श

पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी की संपूर्ण कार्यप्रणाली तथागत गौतम बुद्ध की शिक्षाओं और मानवतावादी आदर्शों पर आधारित है। संस्था के संचालन के लिए पांच आधारभूत सिद्धांतों को 'पंचशील' के रूप में स्वीकार किया गया है:

  • ज्ञान (Knowledge): निरंतर बौद्धिक विकास और सत्य की खोज के प्रति प्रतिबद्धता।
  • करुणा (Compassion): समाज के अंतिम व्यक्ति के प्रति संवेदनशीलता और दया का भाव।
  • लोकतंत्र (Democracy): संस्थागत और सामाजिक जीवन में लोकतांत्रिक मूल्यों का समावेश।
  • समता (Equality): जाति, धर्म और लिंग के भेदभाव से परे समान अवसर की उपलब्धता।
  • न्याय (Justice): सामाजिक, आर्थिक और विधिक न्याय की स्थापना।

3. प्रमुख ऐतिहासिक संस्थानों का विवरण

सोसायटी के अंतर्गत आने वाले संस्थानों का इतिहास भारतीय समाज के परिवर्तन की गाथा है। इसमें निम्नलिखित दो केंद्रों का महत्व अद्वितीय है:

  • सिद्धार्थ कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स, मुंबई (1946): यह सोसायटी का प्रथम संस्थान है, जिसकी स्थापना 20 जून 1946 को हुई थी। यह मुंबई के ऐतिहासिक 'बुद्ध भवन' में संचालित है और इसका प्रशासनिक केंद्र 'आनंद भवन' (Anand Bhavan) है, जिसे हेरिटेज सोसाइटी द्वारा 'विरासत संरचना' घोषित किया गया है। शोध की दृष्टि से इस कॉलेज का पुस्तकालय अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहाँ डॉ. आंबेडकर के व्यक्तिगत संग्रह की वे दुर्लभ पुस्तकें सुरक्षित हैं, जिनका उपयोग उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण के दौरान संदर्भ सामग्री के रूप में किया था। पुस्तकालय में डॉ. आंबेडकर के नाम के साथ उभरी हुई (embossed) संविधान की एक प्रति और अन्य ऐतिहासिक कलाकृतियां भी प्रदर्शित हैं।
  • मिलिंद कॉलेज, औरंगाबाद (1950): मराठवाड़ा क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार के लिए स्थापित इस संस्थान के लिए हैदराबाद के 7वें निजाम, मीर उस्मान अली खान ने 54 एकड़ भूमि प्रदान की थी। इसका नामकरण ऐतिहासिक 'मिलिंदपन्हो' (राजा मिलिंद और बौद्ध भिक्षु नागसेन के बीच संवाद) के आधार पर किया गया है। डॉ. आंबेडकर इस संस्थान की रूपरेखा और डिजाइन में व्यक्तिगत रूप से शामिल थे। ऐतिहासिक तथ्य यह भी है कि डॉ. आंबेडकर ने स्वयं इस कॉलेज के पुस्तकालय की आधारशिला रखी थी।

4. शैक्षणिक विस्तार: संस्थानों की सूची (कालक्रमबद्ध)

पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी ने मुंबई और औरंगाबाद से शुरू होकर पुणे, नांदेड़, महाराष्ट्र के अन्य क्षेत्रों और बिहार के बोधगया तक अपने शैक्षणिक नेटवर्क का विस्तार किया है।

संस्थान का नाम

स्थान

स्थापना वर्ष

सिद्धार्थ कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स

मुंबई

1946

सिद्धार्थ नाइट हाई स्कूल

मुंबई

1946

मिलिंद कॉलेज ऑफ आर्ट्स

औरंगाबाद

1950

मिलिंद कॉलेज ऑफ साइंस

औरंगाबाद

1950

सिद्धार्थ कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स

मुंबई

1953

मिलिंद मल्टीपर्पज हाई स्कूल

औरंगाबाद

1955

सिद्धार्थ कॉलेज ऑफ Law

मुंबई

1956

डॉ. आंबेडकर कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स

वडाला, मुंबई

1956

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर कॉलेज (कला, विज्ञान, वाणिज्य)

महाड, रायगढ़

1963

डॉ. आंबेडकर कॉलेज ऑफ Law

औरंगाबाद

1968

डॉ. आंबेडकर कॉलेज ऑफ Law (तिलक रोड)

वडाला, मुंबई

1971 / 1977*

पी.ई.एस. सेकेंडरी स्कूल एवं जूनियर कॉलेज

नवी मुंबई

1978

पी.ई.एस. इंग्लिश मीडियम स्कूल

येरवडा, पुणे

1978

गौतम विद्यालय

पंढरपुर, सोलापुर

1978

नगासेन हाई स्कूल एवं जूनियर कॉलेज

नांदेड़

1981

डॉ. आंबेडकर कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स

येरवडा, पुणे

1985

पी.ई.एस. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग

औरंगाबाद

1995

डॉ. बी.आर. आंबेडकर कॉलेज ऑफ एजुकेशन

बोधगया, बिहार

2008

डॉ. बी.आर. आंबेडकर कॉलेज

कोल्हापुर

2009

*नोट: ऐतिहासिक संदर्भों में वडाला स्थित डॉ. आंबेडकर कॉलेज ऑफ लॉ की स्थापना वर्ष 1971 और 1977 दोनों का उल्लेख मिलता है, जो गहन शोध का विषय है।

5. ऐतिहासिक विरासत का जतन और संवर्धन (रु. 500 करोड़ की योजना)

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा स्थापित संस्थानों की ऐतिहासिक वास्तुकला को संरक्षित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार के सामाजिक न्याय विभाग ने 500 करोड़ रुपये के विशेष कोष को स्वीकृति दी है। विधानसभा उपाध्यक्ष और सोसायटी से जुड़े अण्णा बनसोडे ने इस योजना के कार्यान्वयन के लिए कड़े निर्देश दिए हैं:

  • यह योजना 9 प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और 2 छात्रावासों के पुनरुद्धार पर केंद्रित है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य केवल मरम्मत करना नहीं, बल्कि इन वास्तुओं की ऐतिहासिक वास्तुकला की मौलिकता (Originality) को पूर्णतः बनाए रखना है।
  • कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक और तकनीकी मान्यताओं को त्वरित आधार पर पूरा करने का प्रावधान किया गया है, ताकि यह ऐतिहासिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी रहे।

6. सामाजिक प्रभाव और निष्कर्ष

पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी डॉ. आंबेडकर के कालजयी दर्शन "शिक्षित बनो, संघर्ष करो, संगठित हो" (Educate, Agitate, Organize) का व्यावहारिक स्वरूप है। शिक्षा के माध्यम से अस्पृश्यता और सामाजिक भेदभाव की बेड़ियों को तोड़ने का जो अभियान 1945 में शुरू हुआ था, वह आज भी जारी है। सोसायटी ने न केवल साक्षरता दर बढ़ाई है, बल्कि एक जागरूक बौद्धिक वर्ग तैयार किया है जो देश के नीति-निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

संस्था की भविष्य की योजनाओं के अंतर्गत, 11 और 12 सितंबर 2026 को छत्रपति संभाजीनगर में 'पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (ICTPES-2026)' का आयोजन प्रस्तावित है। इस सम्मेलन का विषय "डॉ. बी.आर. आंबेडकर की पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी: अतीत, वर्तमान और भविष्य" रखा गया है, जो इस महान विरासत की निरंतरता और वैश्विक प्रासंगिकता को वैश्विक पटल पर प्रस्तुत करेगा।

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