आकाशवाणी भेंट का वृतांत

।आकाशवाणी भेंट का वृत्तांत
(एक आदर्श प्रारूप)

विषय: प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. सुधा सिंह के साथ आकाशवाणी पर भेंट वार्ता
तिथि: 3 अप्रैल 2026
स्थान: आकाशवाणी, दिल्ली केंद्र, स्टूडियो नं. 5
भेंटकर्ता: श्रीमती मीरा शर्मा (वरिष्ठ उद्घोषिका)
वार्ता की अवधि: 20 मिनट

---

प्रस्तावना

आज आकाशवाणी के ‘साहित्य चौपाल’ कार्यक्रम में वरिष्ठ उद्घोषिका श्रीमती मीरा शर्मा ने प्रसिद्ध साहित्यकार एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित डॉ. सुधा सिंह से भेंट की। इस भेंट का उद्देश्य उनके नवीनतम उपन्यास “आखिरी सवाल” पर चर्चा करना तथा समकालीन साहित्य की दशा-दिशा जानना था।

वार्ता का सारांश

मीरा शर्मा: नमस्कार, डॉ. सुधा जी। आपका इस कार्यक्रम में स्वागत है। सबसे पहले बताइए, इस उपन्यास की कहानी को लिखने की प्रेरणा क्या मिली?

डॉ. सुधा सिंह: नमस्कार। दरअसल, यह उपन्यास उन लाखों महिलाओं की आवाज़ है जो रोजमर्रा में ‘आखिरी सवाल’ से जूझती हैं – कि क्या समाज ने उन्हें सही मायने में आज़ादी दी है? मैंने गाँव और शहर की स्त्रियों से मुलाकात की, उनकी व्यथा-कथा सुनी, फिर इसे कलात्मक रूप दिया।

मीरा शर्मा: आपकी भाषा शैली बेहद सरल और प्रवाहमयी है। क्या यह जानबूझकर चुनी गई है?

डॉ. सुधा सिंह: बिल्कुल। मैं चाहती हूँ कि मेरी पुस्तक हर वर्ग का पाठक बिना शब्दकोश के समझ सके। आजकल बहुत सी रचनाएँ कठिन शब्दावली में उलझी रहती हैं, जिससे आम पाठक दूर भागता है। मैंने सरलता को साहित्य का प्राण माना है।

मीरा शर्मा: आने वाले समय में हिंदी साहित्य की क्या संभावनाएँ दिखती हैं?

डॉ. सुधा सिंह: बहुत उज्ज्वल। युवा पीढ़ी अब हिंदी में सोशल मीडिया, ब्लॉग, कविता और कहानियाँ लिख रही है। डिजिटल माध्यमों ने हिंदी को नया जीवन दिया है। ज़रूरत है गुणवत्तापूर्ण लेखन की और संवेदनशील संपादन की।

मीरा शर्मा: आपके अनुसार एक सफल साहित्यकार में क्या गुण होने चाहिए?

डॉ. सुधा सिंह: पहला – सहानुभूति, दूसरा – धैर्य, तीसरा – लगातार पढ़ने की आदत। साहित्यकार समाज का दर्पण होता है, इसलिए उसे आम आदमी के सुख-दुख को समझना चाहिए। और हाँ, शिल्प पर अधिकार भी ज़रूरी है।

मीरा शर्मा: अंत में, अपने प्रशंसकों के लिए क्या संदेश देना चाहेंगी?

डॉ. सुधा सिंह: बस इतना कि किताबें पढ़ते रहिए। किताबें हमें सिखाती हैं, हँसाती हैं, रुलाती हैं और सबसे बढ़कर – हमें इंसान बनाती हैं। और यदि आप लिखते हैं तो निडर होकर लिखिए, सच लिखिए।

समापन

भेंट के अंत में उद्घोषिका ने डॉ. सुधा सिंह को उनके साहित्यिक योगदान के लिए धन्यवाद दिया। श्रोताओं ने फ़ोन-इन के माध्यम से इस वार्ता की सराहना की। आकाशवाणी के प्रसारण नियंत्रण कक्ष से वृत्तांत समाप्त किया गया।

सूचना: यह वृत्तांत आकाशवाणी के दिनांक 3 अप्रैल 2026 के ‘साहित्य चौपाल’ कार्यक्रम के रिकॉर्ड के आधार पर तैयार किया गया है।

---

(हस्ताक्षर)
प्रसारण सहायक
आकाशवाणी, दिल्ली

Comments

Popular posts from this blog

काल के आधार पर वाक्य के प्रकार स्पष्ट कीजिए?

10 New criteria of NAAC and its specialties - Dr. Sangprakash Dudde, Sangameshwar College Solapur

हिंदी भाषा ही जन-जन को जोड़ने वाली भाषा है -डॉ देवराव मुंडे ( हिंदी पखवाड़ा प्रतियोगिता पुरस्कार वितरण समारोह संगमेश्वर कॉलेज तथा लक्ष्मीबाई भाऊराव पाटील महिला महाविद्यालय MOUअंतर्गत समारोह 2025)