मनोहर श्याम जोशी: जीवन परिचय
मनोहर श्याम जोशी: जीवन परिचय
मनोहर श्याम जोशी (९ अगस्त, १९३३ - ३० मार्च, २००६) हिंदी साहित्य और टेलीविजन जगत के एक प्रतिष्ठित स्तंभ थे। वे एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे—उपन्यासकार, पटकथा लेखक, व्यंग्यकार और पत्रकार।
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प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा:
· जन्म: ९ अगस्त, १९३३ को अजमेर, राजस्थान (पैतृक निवास: अल्मोड़ा, उत्तराखंड)।
· शिक्षा: इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए. और पीएच.डी. (हिंदी साहित्य)। उनकी पीएच.डी. का विषय था—"भारतेंदु युगीन नाटक में सामाजिक चेतना"।
कार्यक्षेत्र एवं योगदान:
1. साहित्यिक सफर:
· उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 'सारिका' (टाइम्स ऑफ इंडिया समूह) जैसी लोकप्रिय पत्रिका के संपादक के रूप में की।
· उनकी लेखन शैली में गहन व्यंग्य, मार्मिकता और नए प्रयोग की छाप थी।
· प्रमुख उपन्यास:
· 'कुरु कुरु स्वाहा' (१९७८): यह उपन्यास भारतीय मध्यवर्गीय जीवन की विसंगतियों, राजनीति और तिकड़मबाजी पर एक करारा व्यंग्य है। यह हिंदी का एक क्लासिक उपन्यास माना जाता है।
· 'कसप' (१९८६): अवधी लोकभाषा में लिखा गया यह उपन्यास किस्सागोई की परंपरा को आगे बढ़ाता है।
· 'हरिया हरक्यूलिस की हैरानी' (१९९८): एक विशिष्ट शैली में रचा गया प्रयोगात्मक उपन्यास।
· 'क्याप' (२००२): उनका अंतिम उपन्यास, जो फिर से अवधी लोककथाओं की शैली में है।
· 'काशी का अस्सी' (२००६ में प्रकाशित मरणोपरांत): वाराणसी के संस्कृति और समाज का जीवंत चित्रण।
2. टेलीविजन में क्रांतिकारी योगदान:
· मनोहर श्याम जोशी को भारतीय टेलीविजन धारावाहिकों का जनक माना जाता है।
· उन्होंने 'हम लोग' (१९८४) की पटकथा लिखी, जो भारत का पहला सोप ओपेरा (धारावाहिक) था। इसने टेलीविजन पर मध्यवर्गीय भारतीय परिवार की कहानी को एक नई भाषा दी और अभूतपूर्व लोकप्रियता हासिल की।
· 'बुनियाद' (१९८६-८७) की पटकथा लिखकर उन्होंने भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी और उसके बाद के जीवन को गहराई से चित्रित किया।
· इन धारावाहिकों ने न केवल मनोरंजन किया बल्कि सामाजिक संदेश दिया और राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया।
3. पत्रकारिता:
· 'सारिका', 'दिनमान' और 'नवभारत टाइम्स' जैसे प्रकाशनों से जुड़े रहे।
पुरस्कार एवं सम्मान:
· साहित्य अकादमी पुरस्कार (२००५): उपन्यास 'कुरु कुरु स्वाहा' के लिए।
· पद्मश्री (२००६): साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए।
· व्यास सम्मान (२००६): उपन्यास 'क्याप' के लिए (मरणोपरांत प्रदत्त)।
· महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार।
साहित्यिक विशेषताएँ:
· भाषा पर अद्भुत पकड़: खड़ी बोली के साथ-साथ अवधी और कुमाऊँनी बोलियों का सहज प्रयोग।
· गहन व्यंग्य: समाज और राजनीति की विसंगतियों पर पैनी नजर।
· मध्यवर्ग का चितेरा: भारतीय मध्यवर्ग के सपनों, संघर्षों और विडंबनाओं को बहुत ही सटीकता से उकेरना।
· लोककथा शैली का प्रयोग: अपने उपन्यासों में किस्सागोई की परंपरा को पुनर्जीवित किया।
निधन:
३० मार्च, २००६ को नोएडा, उत्तर प्रदेश में उनका निधन हो गया।
निष्कर्ष:
मनोहर श्याम जोशी एक ऐसे रचनाकार थे जिन्होंने साहित्य और टेलीविजन दोनों को गहराई से प्रभावित किया। उनकी कलम से निकली 'हम लोग' और 'बुनियाद' जैसी कहानियाँ आज भी भारतीय टेलीविजन की स्वर्णिम धरोहर हैं, और 'कुरु कुरु स्वाहा' जैसे उपन्यास हिंदी साहित्य में व्यंग्य का शिखर माने जाते हैं। वे एक ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने पारंपरिक कथा-शिल्प को आधुनिक माध्यमों से जोड़कर एक नया प्रतिमान स्थापित किया।
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