वकील साहब विनय मोहन शर्मा लिखित रेखाचित्र का विश्लेषण

विनय मोहन शर्मा द्वारा रचित 'रेखाचित्र' संग्रह में "वकील साहब" एक विशिष्ट और यथार्थपरक चरित्र है। लेखक ने उनके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को बड़ी ही सूक्ष्मता और जीवंतता से उकेरा है। उनका चरित्र-चित्रण इस प्रकार है:

1. बाह्य स्वरूप एवं व्यक्तित्व:
वकील साहब एक प्रतिष्ठित, अनुभवी और गंभीर व्यक्तित्व के धनी हैं। उनकी वेशभूषा, चश्मे, और उनके हाव-भाव से ही उनकी विद्वता और गरिमा झलकती है। वे कानून के ज्ञाता तो हैं ही, साथ ही जीवन के गहन अनुभव से भी परिपूर्ण हैं।

2. विद्वता और वाक्पटुता:
वे अत्यंत पढ़े-लिखे और विद्वान हैं। कानूनी ज्ञान के साथ-साथ उनका साहित्यिक, सामाजिक एवं दार्शनिक ज्ञान भी गहरा है। उनकी वाणी में तर्क और ओज है। वे अपनी बात को स्पष्ट, प्रभावशाली और तार्किक ढंग से रखने में माहिर हैं।

3. मानवीय संवेदना:
विद्वता और गंभीरता के पीछे वकील साहब एक संवेदनशील हृदय के भी धनी हैं। वे मानवीय कमजोरियों और संघर्षों को समझते हैं। उनके भीतर न्याय के प्रति आग्रह है, साथ ही पीड़ित और साधारण लोगों के प्रति सहानुभूति भी। वे केवल कानूनी धाराओं की दुहाई नहीं देते, बल्कि नैतिकता और मानवीय मूल्यों को भी महत्व देते हैं।

4. व्यावहारिकता और यथार्थबोध:
अपने लंबे अनुभव के कारण वे दुनियादारी और समाज की वास्तविकताओं से भली-भाँति परिचित हैं। वे आदर्शवादी सिद्धांतों से हटकर व्यावहारिक समाधान खोजने पर बल देते हैं। उनकी सलाह और दृष्टिकोण में यह यथार्थबोध स्पष्ट झलकता है।

5. सामाजिक भूमिका:
समाज में वकील साहब का दर्जा एक आदरणीय सलाहकार और मार्गदर्शक का है। लोग न केवल कानूनी समस्याओं, बल्कि जीवन के विविध पहलुओं पर भी उनकी राय को महत्व देते हैं। वे समाज को जागरूक करने और न्याय दिलाने में एक सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

6. विरोधाभासों से युक्त चरित्र:
लेखक ने उनके चरित्र को एकांगी नहीं, बल्कि बहुआयामी बनाया है। कभी-कभी उनकी गंभीरता में हल्का व्यंग्य झलकता है, तो कभी उनकी दृढ़ता के पीछे दया भाव दिखाई देता है। यह विरोधाभास उनके चरित्र को और अधिक वास्तविक और रोचक बनाता है।

7. भाषा-शैली:
वकील साहब की अपनी एक विशिष्ट भाषा-शैली है। वे हिंदी, संस्कृत के साथ-साथ अंग्रेजी के शब्दों और कानूनी परिभाषाओं का प्रयोग करते हैं। उनकी भाषा प्रभावशाली, स्पष्ट और उद्देश्यपूर्ण होती है।

निष्कर्ष:
विनय मोहन शर्मा ने 'वकील साहब' के चरित्र के माध्यम से न केवल एक व्यक्ति विशेष का, बल्कि उस पूरी पीढ़ी और पेशे का जीवंत चित्रण किया है जो ज्ञान, अनुभव, नैतिकता और व्यावहारिकता के बीच संतुलन बनाते हैं। वे केवल एक वकील नहीं, बल्कि एक दार्शनिक, मार्गदर्शक और संवेदनशील मानव के रूप में उभरकर सामने आते हैं। यह चरित्र हिंदी रेखाचित्र साहित्य की एक अमिट उपलब्धि है।

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