टेलीविजन : एक परिचय
टेलीविजन : एक परिचय
टेलीविजन (दूरदर्शन) 20वीं सदी का सबसे प्रभावशाली दृश्य-श्रव्य संचार माध्यम है, जो ध्वनि और चलचित्रों को रेडियो तरंगों, केबल या उपग्रह के माध्यम से दूर-दूर तक प्रसारित करता है। यह मनोरंजन, शिक्षा, सूचना और विचारों के आदान-प्रदान का एक शक्तिशाली साधन बन गया है।
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मूलभूत परिभाषा
टेलीविजन एक तकनीकी प्रणाली है जिसमें कैमरे द्वारा दृश्यों को विद्युत संकेतों में बदला जाता है, फिर इन संकेतों को प्रसारण माध्यम से घर-घर में स्थित टीवी सेट तक पहुँचाया जाता है, जो उन्हें फिर से दृश्य व ध्वनि में परिवर्तित कर देता है। इसे अक्सर "आधुनिक युग का जादूई पेटी" कहा जाता है।
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संक्षिप्त ऐतिहासिक विकास
1. प्रारंभिक खोजें (19वीं-20वीं सदी):
· पॉल निपकोव (1884) ने एक घूमने वाली डिस्क (निपकोव डिस्क) का आविष्कार किया, जिसने यांत्रिक टेलीविजन की नींव रखी।
· जॉन लोगी बेयर्ड (स्कॉटलैंड) ने 1926 में यांत्रिक टेलीविजन का पहला सफल प्रदर्शन किया।
· व्लादिमीर ज़्वोर्यकिन (रूस) और फिलो फ़ार्न्सवर्थ (अमेरिका) ने इलेक्ट्रॉनिक टेलीविजन प्रणाली विकसित की।
2. प्रसारण की शुरुआत:
· नियमित टीवी प्रसारण 1929 में जर्मनी और 1936 में बीबीसी (लंदन) से शुरू हुआ।
· रंगीन टेलीविजन का व्यावसायिक प्रसारण 1950 के दशक में अमेरिका से शुरू हुआ।
3. भारत में टेलीविजन की शुरुआत:
· प्रायोगिक प्रसारण: 15 सितंबर 1959, दिल्ली (यूनेस्को की सहायता से)।
· नियमित प्रसारण: 1965 में आकाशवाणी के एक अंग के रूप में दिल्ली में शुरू हुआ।
· दूरदर्शन (Doordarshan): 1976 में प्रसार भारती के अधीन एक स्वतंत्र सेवा बना।
· मील के पत्थर:
· 1982: राष्ट्रीय प्रसारण और एशियाई खेलों का रंगीन प्रसारण।
· 1980 का दशक: 'हम लोग' (1984), 'रामायण' (1987), 'महाभारत' (1988) जैसे धारावाहिकों ने देश को एक सूत्र में बाँधा।
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टेलीविजन के प्रमुख तत्व
1. स्टूडियो/स्थल: जहाँ कार्यक्रम रिकॉर्ड या लाइव प्रसारित होते हैं।
2. कैमरा एवं माइक्रोफोन: दृश्य और ध्वनि को संकेतों में बदलते हैं।
3. प्रसारण केंद्र/उपग्रह: संकेतों को प्रसारित करता है।
4. टीवी सेट/रिसीवर: संकेतों को प्राप्त कर छवि और आवाज़ में बदलता है।
5. निर्माता-निर्देशक: कार्यक्रम की रचना और निर्माण।
6. उद्घोषक/प्रस्तोता (एंकर, होस्ट): कार्यक्रम का संचालन।
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टेलीविजन के प्रकार
1. प्रसारण तकनीक के आधार पर:
· एनालॉग टेलीविजन: पुरानी तकनीक, सिग्नल गुणवत्ता कम।
· डिजिटल टेलीविजन (DTH, डिजिटल केबल): उच्च गुणवत्ता (HD, 4K), अधिक चैनल, इंटरेक्टिव सेवाएँ।
2. सामग्री एवं व्यवसाय मॉडल के आधार पर:
· मुफ्त-से-वायु (FTA) चैनल: सब्सक्रिप्शन शुल्क नहीं, राजस्व विज्ञापन से।
· पे-चैनल: देखने के लिए शुल्क देना पड़ता है।
· सार्वजनिक प्रसारक (जैसे- दूरदर्शन): शिक्षा और सूचना पर जोर।
· निजी/वाणिज्यिक चैनल (जैसे- स्टार, जी): मनोरंजन और विज्ञापन पर केन्द्रित।
· समाचार चैनल: 24x7 समाचार और विश्लेषण।
3. आधुनिक रूप:
· स्मार्ट टीवी: इंटरनेट से जुड़कर OTT प्लेटफॉर्म (नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम) सीधे देखने की सुविधा।
· IPTV (इंटरनेट प्रोटोकॉल टीवी): इंटरनेट के माध्यम से टीवी सेवा।
· OTT (ओवर-द-टॉप) प्लेटफॉर्म: इंटरनेट पर ऑन-डिमांड वीडियो सामग्री।
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टेलीविजन का सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव
1. ज्ञान का विश्वकोश: समाचार, वृत्तचित्र, शैक्षिक कार्यक्रमों के माध्यम से ज्ञान का प्रसार।
2. मनोरंजन का सबसे लोकप्रिय साधन: फिल्में, धारावाहिक, रियलिटी शो, खेल प्रसारण।
3. सामाजिक बदलाव का उत्प्रेरक: महिला सशक्तिकरण, सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जागरूकता (उदा: 'सत्यमेव जयते')।
4. राष्ट्रीय एकता एवं सार्वजनिक विमर्श: महत्वपूर्ण राष्ट्रीय घटनाओं का सजीव प्रसारण लोगों को जोड़ता है।
5. बाज़ार एवं उपभोक्तावाद: विज्ञापनों के माध्यम से उपभोक्ता व्यवहार और संस्कृति को प्रभावित करना।
6. संस्कृति का प्रसार: भारतीय सिनेमा और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने में मददगार।
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टेलीविजन की विशेषताएँ (अन्य माध्यों से तुलना)
· रेडियो से: दृश्यात्मक प्रभाव टेलीविजन की सबसे बड़ी ताकत है। "एक तस्वीर हज़ार शब्दों के बराबर होती है।"
· अखबार से: तात्कालिकता और सजीवता। घटना को घटित होते ही दिखा सकता है।
· सिनेमा से: घरेलू मनोरंजन, निरंतर और निःशुल्क (या कम लागत) सामग्री की आपूर्ति।
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आज के डिजिटल युग में टेलीविजन
1. चुनौतियाँ:
· OTT प्लेटफॉर्म्स का उदय: नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, डिज़नी+ हॉटस्टार जैसी सेवाओं ने देखने की आदतें बदली हैं।
· युवा दर्शकों का रुझान कम होना: युवा स्मार्टफोन और इंटरनेट वीडियो की ओर आकर्षित।
· सामग्री की भरमार एवं ध्यान आकर्षण: सैकड़ों चैनलों के बीच प्रतिस्पर्धा।
2. संभावनाएँ एवं भविष्य:
· स्मार्ट टीवी और कन्वर्जेंस: टीवी अब इंटरनेट, गेमिंग और स्ट्रीमिंग का केंद्र बन गया है।
· इंटरेक्टिव टीवी: दर्शक फ़ैसलों में भाग ले सकते हैं, सीधे खरीदारी कर सकते हैं।
· हाई-डेफिनिशन (HD/4K/8K) और VR: देखने के अनुभव में अभूतपूर्व वृद्धि।
· हाइपरलोकल और निचे कंटेंट: विशिष्ट रुचियों वाले दर्शकों के लिए विशेष सामग्री।
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निष्कर्ष
टेलीविजन एक "परिवार का माध्यम" से एक "व्यक्तिगत अनुभव" की ओर बढ़ रहा है। इसने समाज को "वैश्विक गाँव" बनाने में अहम भूमिका निभाई है। तकनीक बदल रही है, लेकिन कहानी सुनाने और जानकारी पहुँचाने की इसकी शक्ति अब भी बरकरार है। भविष्य में, टेलीविजन पारंपरिक प्रसारण और डिजिटल स्ट्रीमिंग के सम्मिलित रूप में विकसित होकर मनोरंजन एवं सूचना के क्षेत्र में अपना केंद्रीय स्थान बनाए रखेगा। यह हमारे दैनिक जीवन, संस्कृति और सामाजिक चेतना का एक अभिन्न अंग बना हुआ है।
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