इंटरनेट : एक परिचय

इंटरनेट : एक परिचय

इंटरनेट दुनिया भर में फैले कंप्यूटर नेटवर्कों का एक विशाल जाल (नेटवर्क ऑफ नेटवर्क्स) है, जो सूचनाओं के आदान-प्रदान और वैश्विक संचार को संभव बनाता है। यह आधुनिक डिजिटल युग की रीढ़ की हड्डी और सूचना क्रांति का केंद्र बिंदु है।

---

मूलभूत परिभाषा

इंटरनेट एक वैश्विक दूरसंचार नेटवर्क है जो अरबों उपकरणों (कंप्यूटर, स्मार्टफोन, सर्वर) को TCP/IP (ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल/इंटरनेट प्रोटोकॉल) नामक मानक नियमों के सेट के माध्यम से आपस में जोड़ता है। यह सूचना का अंतहीन सागर और विश्व का सबसे बड़ा पुस्तकालय है।

---

संक्षिप्त ऐतिहासिक विकास

1. शीत युद्ध की देन (1960s):
   · ARPANET (एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी नेटवर्क): 1969 में अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा शुरू किया गया, ताकि युद्ध के समय भी संचार बना रहे। यह इंटरनेट का पूर्वज था।
   · पहला संदेश "LOGIN" 1969 में UCLA से स्टैनफोर्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट भेजा गया।
2. नेटवर्कों का जाल बनना (1970s-80s):
   · TCP/IP प्रोटोकॉल का विकास हुआ (1973)।
   · WWW (वर्ल्ड वाइड वेब) का जन्म: 1989 में टिम बर्नर्स-ली (CERN, स्विट्ज़रलैंड) ने वेब का आविष्कार किया। उन्होंने HTML, HTTP और URL जैसी अवधारणाएँ दीं।
   · पहला वेब ब्राउज़र: 1990 में 'वर्ल्डवाइडवेब' नाम से बनाया गया।
3. जनता के लिए खुलना (1990s):
   · 1990 के दशक में इंटरनेट वाणिज्यिक और सार्वजनिक उपयोग के लिए खुल गया।
   · वेब ब्राउज़र "मोज़ेक" (1993) के बाद इंटरनेट का विस्फोटक विकास हुआ।
4. भारत में इंटरनेट:
   · शुरुआत: 15 अगस्त 1995 को विदेश संचार निगम लिमिटेड (VSNL) द्वारा सार्वजनिक सेवा की शुरुआत।
   · तेजी से विकास: 2000 के बाद ब्रॉडबैंड और मोबाइल इंटरनेट (विशेष रूप से 4G, 2016 के बाद) ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट उपयोक्ता बाजारों में से एक बना दिया।

---

इंटरनेट कैसे काम करता है?

1. उपकरण: आपका कंप्यूटर/फोन क्लाइंट है।
2. ISP (इंटरनेट सेवा प्रदाता): जो आपको नेटवर्क से जोड़ता है (जैसे- Jio, Airtel)।
3. मोडेम/राउटर: सिग्नल को समझने और भेजने का काम करता है।
4. सर्वर: वह कंप्यूटर जहाँ वेबसाइट और डेटा संग्रहीत होते हैं।
5. TCP/IP: यह नियम तय करता है कि डेटा के पैकेट कैसे भेजे और प्राप्त किए जाएँ।
6. DNS (डोमेन नेम सिस्टम): वेबसाइट के नाम (जैसे www.google.com) को सर्वर के आईपी एड्रेस में बदलता है।

---

इंटरनेट की प्रमुख सेवाएँ एवं उपयोग

1. वर्ल्ड वाइड वेब (WWW): हाइपरटेक्स्ट दस्तावेज़ों (वेबसाइटों) का एक विशाल नेटवर्क।
2. ईमेल: इलेक्ट्रॉनिक डाक सेवा।
3. सोशल मीडिया: फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप – संपर्क और सामग्री साझा करना।
4. खोज इंजन: गूगल, बिंग – सूचना ढूँढने का साधन।
5. मीडिया स्ट्रीमिंग: यूट्यूब, नेटफ्लिक्स, स्पॉटिफाई – वीडियो/ऑडियो सामग्री।
6. ई-कॉमर्स: अमेज़न, फ्लिपकार्ट – ऑनलाइन खरीदारी।
7. ऑनलाइन बैंकिंग एवं डिजिटल भुगतान: इंटरनेट बैंकिंग, पेटीएम, यूपीआई।
8. क्लाउड कंप्यूटिंग: डेटा और सॉफ्टवेयर को इंटरनेट पर स्टोर और एक्सेस करना।
9. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग: ज़ूम, गूगल मीट – दूरस्थ संचार।
10. ऑनलाइन शिक्षा (ई-लर्निंग): कोर्सेरा, बायजूस।

---

इंटरनेट का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

1. सूचना लोकतंत्रीकरण: ज्ञान तक पहुँच सभी के लिए (सैद्धांतिक रूप से) खुल गई।
2. वैश्विक गाँव का साकार रूप: दुनिया भर के लोगों से त्वरित संपर्क।
3. शिक्षा क्रांति: ऑनलाइन पाठ्यक्रम, डिजिटल लाइब्रेरी, वीडियो व्याख्यान।
4. अर्थव्यवस्था का रूपांतरण: डिजिटल इकोनॉमी, स्टार्ट-अप संस्कृति, नए रोजगार।
5. सुशासन एवं पारदर्शिता: ई-गवर्नेंस, सूचना का अधिकार, शिकायत निवारण।
6. मनोरंजन उद्योग में क्रांति: ऑन-डिमांड कंटेंट, सोशल मीडिया सितारे।
7. सामाजिक आंदोलन: जनमत निर्माण, जागरूकता फैलाने का शक्तिशाली माध्यम।

---

इंटरनेट की विशेषताएँ

· वैश्विक पहुँच
· लागत प्रभावी
· अंतरक्रियाशीलता (इंटरेक्टिविटी)
· लचीलापन (स्केलेबिलिटी)
· अनेकरूपता (मल्टीमीडिया)
· वास्तविक समय संचार

---

चुनौतियाँ एवं जोखिम

1. डिजिटल डिवाइड: समाज के गरीब और कम शिक्षित वर्ग तक पहुँच का अभाव।
2. साइबर सुरक्षा खतरे: हैकिंग, फ़िशिंग, मालवेयर, रैन्समवेयर।
3. गोपनीयता का हनन: निजी डेटा का दुरुपयोग, निगरानी।
4. गलत सूचना (फेक न्यूज) एवं अभद्र भाषा: सोशल मीडिया पर अफवाहों और नफरत का तेजी से प्रसार।
5. साइबर बुलिंग एवं ऑनलाइन उत्पीड़न।
6. डिजिटल व्यसन: मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव।
7. डिजिटल अर्थव्यवस्था में एकाधिकार (जैसे- बड़ी टेक कंपनियाँ)।

---

भविष्य की दिशाएँ

1. इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT): रोजमर्रा की वस्तुओं का इंटरनेट से जुड़ाव (स्मार्ट होम, स्मार्ट सिटी)।
2. 5G और उसके आगे: अत्यधिक तेज गति और कम विलंबता, नए अनुप्रयोगों को जन्म देगा।
3. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का एकीकरण: व्यक्तिगत अनुभव, स्वचालन और डेटा विश्लेषण।
4. मेटावर्स: इंटरनेट का आभासी (वर्चुअल) और संवर्धित (ऑगमेंटेड) रूप।
5. विकेंद्रीकृत वेब (Web3): ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित, उपयोक्ता-केंद्रित इंटरनेट।

---

निष्कर्ष

इंटरनेट मानव इतिहास के सबसे परिवर्तनकारी आविष्कारों में से एक है। इसने संचार, शिक्षा, व्यापार और मनोरंजन के तरीकों को मूल रूप से बदल दिया है। यह एक दोधारी तलवार है – जहाँ एक ओर इसने अवसरों की अभूतपूर्व दुनिया खोली है, वहीं इसने गंभीर सामाजिक और नैतिक चुनौतियाँ भी पैदा की हैं। भविष्य में, एक जिम्मेदार, सुरक्षित, समावेशी और नैतिक डिजिटल दुनिया बनाना सबसे बड़ी परीक्षा होगी। इंटरनेट अब केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि मानव सभ्यता का एक अटूट अंग बन चुका है।

Comments

Popular posts from this blog

काल के आधार पर वाक्य के प्रकार स्पष्ट कीजिए?

10 New criteria of NAAC and its specialties - Dr. Sangprakash Dudde, Sangameshwar College Solapur

हिंदी भाषा ही जन-जन को जोड़ने वाली भाषा है -डॉ देवराव मुंडे ( हिंदी पखवाड़ा प्रतियोगिता पुरस्कार वितरण समारोह संगमेश्वर कॉलेज तथा लक्ष्मीबाई भाऊराव पाटील महिला महाविद्यालय MOUअंतर्गत समारोह 2025)