मां का नमस्कार कविता की समीक्षा कीजिए
मंगलेश डबराल की यह कविता ‘माँ का नमस्कार’ सादगी और गहराई के साथ जीवन, मृत्यु और मानवीय संबंधों के सार को छूती है। कविता एक वृद्ध माँ के चरित्र के माध्यम से विनम्रता, आतिथ्य और अस्तित्व के प्रति एक आत्मीय स्वीकारोक्ति को दर्शाती है।
मुख्य बिंदु:
1. विनम्रता का चरम रूप: कविता में माँ की विनम्रता इतनी प्रबल है कि वह अपनी वृद्धावस्था में भी सभी को नमस्कार करती है, जैसे वह एक बच्ची हो। यहाँ ‘बच्ची’ शब्द महत्वपूर्ण है – बच्चे की तरह निश्छल, बिना अहंकार के, सभी को समान सम्मान देने वाली भावना।
2. आतिथ्य का भाव: ‘बैठो कुछ खाओ’ – यह वाक्य केवल एक औपचारिक आग्रह नहीं, बल्कि उसके जीवन दर्शन का हिस्सा बन चुका है। यह भोजन देने का नहीं, बल्कि संबंध बाँटने, स्नेह लुटाने का आग्रह है।
3. मृत्यु के प्रति दृष्टिकोण: कवि का अनुमान कि माँ ने मृत्यु को भी नमस्कार किया होगा और कहा होगा – “बैठो कुछ खाओ” – यह पंक्ति कविता को दार्शनिक ऊँचाई देती है। मृत्यु को भी एक अतिथि की तरह स्वीकार करना, उससे डरने या उसका विरोध करने के बजाय उसे आतिथ्य देना, यह जीवन के प्रति एक अद्भुत समर्पण और शांति दर्शाता है।
4. प्रतीकात्मकता: माँ का ‘धरती को नमस्कार करना’ प्रकृति और अपने मूल से जुड़ाव को दर्शाता है। वह अपने अंतिम समय में भी उसी धरती को प्रणाम करती है जिससे उसका शरीर बना है।
5. भाषा और शैली: डबराल की भाषा सरल, बोलचाल के करीब, लेकिन अर्थगर्भित है। दैनिक जीवन के दृश्यों और संवादों को काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी गई है। ‘नमस्कार’ शब्द पूरी कविता का केंद्रीय भाव बन जाता है – यह केवल अभिवादन नहीं, बल्कि जीवन के प्रति आदर, समर्पण और एक तरह की आध्यात्मिक भावना है।
समीक्षा:
यह कवितामानवीय संवेदनाओं को बहुत ही कोमलता और गहराई से व्यक्त करती है। इसमें न तो अतिरंजना है, न ही भावुकतापूर्ण लगाव। माँ का चरित्र एक सार्वभौमिक प्रतीक बन जाता है – वह जीवन के प्रति प्रेम, मृत्यु के प्रति शांत स्वीकार, और संबंधों के प्रति निस्वार्थ भाव का प्रतिनिधित्व करती है। डबराल ने सामान्य जीवन की एक ऐसी छवि को चुना है जो हम सबके आसपास है, लेकिन उसमें छिपे गहन दर्शन को उजागर कर दिया है। कविता पाठक को भीतर तक छू जाती है और जीवन के प्रति एक नई दृष्टि देती है – विनम्रता, आतिथ्य और स्वीकार का मार्ग।
अंततः, यह कविता माँ के माध्यम से भारतीय जीवन मूल्यों और अस्तित्व के प्रति एक शांत, गरिमामय दृष्टिकोण का सुंदर चित्रण है।
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