सिनेमा : एक परिचय
सिनेमा : एक परिचय
सिनेमा (चलचित्र) कलाओं का सम्मिलित रूप है जो गतिमान छवियों और ध्वनि के माध्यम से कहानी कहता है, मनोरंजन करता है, सूचना देता है और दर्शकों पर भावनात्मक-बौद्धिक प्रभाव छोड़ता है। यह 20वीं सदी की सर्वाधिक लोकप्रिय और प्रभावशाली कला बन गई।
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मूल परिभाषा
सिनेमा एक तकनीकी आविष्कार है जो "दृष्टि भ्रम" (Persistence of Vision) के सिद्धांत पर काम करता है, जहाँ तेज गति से दिखाए गए स्थिर चित्र गतिमान प्रतीत होते हैं। इसे "सप्तम कला" (7th Art) भी कहा जाता है।
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संक्षिप्त ऐतिहासिक विकास
1. प्रारंभिक प्रयोग (1890s):
· लुमियर ब्रदर्स (फ्रांस) को आधुनिक सिनेमा का जनक माना जाता है। उन्होंने 1895 में पहली सार्वजनिक फिल्म प्रदर्शनी की।
· पहली फिल्में बहुत छोटी (कुछ सेकंड/मिनट) और दैनिक जीवन के दृश्य (जैसे- 'ट्रेन का स्टेशन में प्रवेश') होती थीं।
2. मूक फिल्मों का युग (1890s-1920s):
· कहानियाँ बताने की शुरुआत। चार्ली चैपलिन इस दौर के सबसे महान कलाकार।
· संगीत और इंटर-टाइटल कार्ड से मदद ली जाती थी।
3. ध्वनि का आगमन (1927):
· 'द जैज़ सिंगर' (1927) पहली बोलती फिल्म। यह एक क्रांतिकारी बदलाव था।
4. रंगीन फिल्मों का विकास (1930s-1950s):
· 'द विज़ार्ड ऑफ ओज़' (1939) और 'गोन विद द विंड' (1939) जैसी फिल्मों ने रंग के जादू को स्थापित किया।
5. भारत में सिनेमा की शुरुआत:
· दादा साहेब फाल्के को भारतीय सिनेमा का पिता माना जाता है।
· पहली भारतीय मूक फिल्म: 'राजा हरिश्चंद्र' (1913)।
· पहली बोलती फिल्म: 'आलम आरा' (1931)।
· पहली रंगीन फिल्म: 'किसान कन्या' (1937)।
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सिनेमा के मुख्य तत्व (अंग)
एक फिल्म निर्माण इन तत्वों के समन्वय से होता है:
1. पटकथा (Script): फिल्म की रीढ़। संवाद और दृश्यों का लिखित रूप।
2. निर्देशन (Direction): निर्देशक फिल्म का मुख्य रचनाकार होता है, जो सभी तत्वों को एक दृष्टि में बांधता है।
3. अभिनय (Acting): कलाकार पात्रों में जान डालते हैं।
4. छायांकन (Cinematography): कैमरे के माध्यम से दृश्यों को रचना। इसे "चित्रों से लिखना" कहा जाता है।
5. संपादन (Editing): शूट किए गए दृश्यों को काट-छाँट कर एक सुसंगत क्रम में जोड़ना।
6. ध्वनि (Sound): संवाद, पार्श्व संगीत (Background Score) और ध्वनि प्रभाव (Sound Effects)।
7. कला निर्देशन (Art Direction): सेट, साज-सज्जा, वेशभूषा, मेकअप आदि की रचना।
8. संगीत (Music): गीत और पार्श्वसंगीत फिल्म के भावनात्मक प्रभाव को गहरा करते हैं।
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फिल्म शैलियाँ (विधाएँ / Genres)
1. मुख्य शैलियाँ: नाटक (Drama), कॉमेडी, एक्शन, थ्रिलर, हॉरर, रोमांस, विज्ञान-फंतासी (Sci-Fi)।
2. आधारित: जीवनी (Biopic), ऐतिहासिक, सामाजिक, यथार्थवादी।
3. दर्शक के अनुसार: बच्चों की फिल्म (एनिमेशन), वयस्क फिल्म।
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भारतीय सिनेमा: विशेषताएँ एवं स्वरूप
1. बहुभाषी एवं विविध: हिंदी (बॉलीवुड), तमिल (कोलीवुड), तेलुगु (टॉलीवुड), मलयालम, बंगाली, कन्नड़, पंजाबी आदि।
2. मसाला फिल्म फॉर्मेट: एक ही फिल्म में गीत-संगीत, नृत्य, रोमांस, एक्शन, हास्य और नाटक का मिश्रण। यह भारतीय सिनेमा की एक अनूठी पहचान है।
3. सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव: फिल्में यहाँ जीवनशैली, फैशन और विचारों को प्रभावित करती हैं।
4. निर्देशकों की विशिष्ट धाराएँ:
· समानांतर सिनेमा (New Wave): सत्यजीत रे (बंगाल), मृणाल सेन, श्याम बेनेगल, गोविंद निहलानी। यथार्थवादी और सामाजिक विषय।
· मुख्यधारा (Mainstream): राजकपूर, यश चोपड़ा, संजय लीला भंसाली। लोकप्रिय मनोरंजन।
· नए युग की फिल्में: अनुराग कश्यप, दिबाकर बनर्जी, ज़ोया अख्तर। विविध और प्रयोगधर्मी कहानियाँ।
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सिनेमा का सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व
1. मनोरंजन का शक्तिशाली साधन: तनाव मुक्ति और आनंद का स्रोत।
2. सामाजिक दर्पण: समकालीन मुद्दों (जाति, लिंग, असमानता) को प्रतिबिंबित और प्रभावित करता है।
3. शिक्षा एवं जागरूकता: स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध प्रभावी संचार माध्यम।
4. सांस्कृतिक राजदूत: भारतीय संस्कृति और मूल्यों को वैश्विक पटल पर पहुँचाता है।
5. रोजगार का विशाल क्षेत्र: अभिनेता, निर्देशक, तकनीशियन, प्रोडक्शन से जुड़े लाखों लोगों को रोजगार।
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आज के युग में परिवर्तन एवं चुनौतियाँ
1. डिजिटल क्रांति: OTT प्लेटफॉर्म (नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम) ने देखने की आदतें बदली हैं।
2. विशेष प्रभाव (VFX): कम्प्यूटर ग्राफिक्स ने दृश्यों की संभावनाओं को अद्भुत विस्तार दिया है।
3. चुनौतियाँ: सेंसरशिप, पायरेसी, फिल्मों का व्यावसायिक दबाव, सामग्री की नकल (प्लेजरिज़म)।
4. नई संभावनाएँ: छोटे बजट और स्वतंत्र फिल्मों के लिए ओटीटी मंच नए अवसर लाए हैं।
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निष्कर्ष
सिनेमा केवल "फिल्में देखना" नहीं है; यह एक सामूहिक अनुभव, एक सांस्कृतिक अभिलेख और एक शक्तिशाली कलात्मक अभिव्यक्ति है। यह हमें हँसाता है, रुलाता है, सोचने पर मजबूर करता है और कई बार हमारे दृष्टिकोण को बदल देता है। तकनीक के साथ विकसित होता हुआ सिनेमा आज भी मानवीय कहानियाँ सुनाने और दुनिया को समझने का एक अपरिहार्य माध्यम बना हुआ है।
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