छत्रपति शिवाजी महाराज का गौरवशाली इतिहास -प्रा डॉ संघप्रकाश दुड्डे

छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास और उनकी विरासत एक गौरवशाली अध्याय है, जिसमें उनका जन्म, शासनकाल, सैन्य रणनीति, प्रशासनिक व्यवस्था और मुगलों के साथ संघर्ष शामिल हैं। यहाँ विस्तृत विवरण प्रस्तुत है:1. जन्म और प्रारंभिक जीवन**
- **जन्म**: शिवाजी का जन्म **19 फरवरी 1630** को शिवनेरी दुर्ग (पुणे के निकट) में हुआ था ।  
- **परिवार**: उनके पिता **शाहजी भोंसले** (बीजापुर सल्तनत के सेनापति) और माता **जीजाबाई** (एक धार्मिक एवं वीरांगना महिला) थीं। माता के संस्कारों और रामायण-महाभारत की शिक्षाओं ने उनके चरित्र को गढ़ा ।  
- **गुरु**: उनके संरक्षक मातोश्री जीजाबाई * ने युद्धकला, राजनीति और धर्म की शिक्षा दी। संत तुकाराम ने भी उन्हें राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा दी ।  
*2. सैन्य उपलब्धियाँ और प्रमुख किले**
- **किलों पर अधिकार**:  
  - **तोरण किला (1645)**: किशोरावस्था में पहला विजय अभियान ।  
  - **रायगढ़, सिंहगढ़, पुरंदर**: रणनीतिक महत्व के किले जिन्हें उन्होंने सुरक्षित किया ।  
  - **गुरिल्ला युद्धनीति**: "शिवसूत्र" के तहत छापामार युद्ध की नई शैली विकसित की ।  
3. राज्याभिषेक और शासन व्यवस्था**
- **राज्याभिषेक**: **6 जून 1674** को रायगढ़ में हुआ, जहाँ उन्हें **छत्रपति**, **हैंदव धर्मोधारक** जैसी उपाधियाँ मिलीं ।  
- **प्रशासनिक व्यवस्था**:  
  - **अष्टप्रधान मंडल**: 8 मंत्रियों की परिषद (जैसे पेशवा, सेनापति, अमात्य) ।  
  - **प्रांतीय विभाजन**: स्वराज को 4 प्रांतों में बाँटा, जिन्हें सरदारों के अधीन रखा ।  
  - **न्याय व्यवस्था**: न्यायधीश और पंडितराव धार्मिक एवं सामाजिक न्याय के लिए उत्तरदायी थे ।  
*4. मुगलों के साथ संघर्ष और आगरा की घटना**
- **प्रमुख युद्ध**:  
  - **प्रतापगढ़ (1659)**: अफजल खान को पराजित किया ।  
  - **सूरत (1664)**: मुगल व्यापारिक केंद्र पर धावा बोला ।  
  - **पुरंदर संधि (1665)**: मुगलों से कुछ किले छोड़ने पड़े ।  
- **आगरा में कैद और भागने की कथा**:  
  - 1666 में औरंगजेब से मिलने गए, पर उनका अपमान हुआ। गिरफ्तार हुए, लेकिन **मिठाई की टोकरी में छिपकर भागने** की लोककथा प्रसिद्ध है (हालाँकि ऐतिहासिक प्रमाण अधूरे हैं) ।  5. संभाजी महाराज और उत्तराधिकार**
- **संभाजी**: शिवाजी के ज्येष्ठ पुत्र, जिन्होंने 1680-1689 तक शासन किया। वे विद्वान थे (संस्कृत ग्रंथों की रचना की) लेकिन मुगलों के साथ संघर्ष में **1689 में औरंगजेब द्वारा मारे गए** ।  
- **मराठा साम्राज्य का पतन**:  
  - **आंतरिक कलह**: संभाजी के बाद उत्तराधिकार संघर्ष।  
  - **पानीपत का तीसरा युद्ध (1761)**: अफगानों से हार के बाद साम्राज्य कमजोर हुआ ।  
  - **अंग्रेजों का प्रभुत्व**: 1818 में तीसरे एंग्लो-मराठा युद्ध में अंतिम हार ।  
6. शिवाजी की प्रासंगिकता**
- **राष्ट्रीय प्रतीक**: स्वतंत्रता संग्राम में बाल गंगाधर तिलक ने उन्हें प्रेरणास्रोत बनाया ।  
- **धार्मिक सहिष्णुता**: मुस्लिम सैनिकों और अधिकारियों को सेना में शामिल किया, धर्मनिरपेक्ष नीति अपनाई ।  
- **प्रशासनिक नवाचार**: किलों की सुरक्षा, नौसेना का विकास और स्थानीय स्वशासन पर जोर ।  
*निष्कर्ष**शिवाजी महाराज ने न केवल एक सशक्त मराठा साम्राज्य की स्थापना की, बल्कि उनकी न्यायप्रियता, सैन्य कौशल और धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण आज भी प्रासंगिक हैं। उनका जीवन भारतीय इतिहास में स्वाभिमान और रणनीतिक सूझबूझ का उत्कृष्ट उदाहरण है।

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